कतारों में खड़ा भारत – नोटबंदी से कोरोना तक आम नागरिक की अनकही कहानी
भारत की तस्वीर सिर्फ उसकी तरक्की, विकास और उपलब्धियों से नहीं बनती, बल्कि उन संघर्षों से भी बनती है जिन्हें आम नागरिक रोज़ जीता है। बीते कुछ वर्षों में देश ने ऐसे दो बड़े दौर देखे, जब सड़कों से लेकर अस्पतालों तक सिर्फ एक ही चीज़ नजर आई—लंबी कतारें। ये कतारें सिर्फ इंतज़ार की नहीं थीं, बल्कि बेबसी, उम्मीद और जंग की प्रतीक बन गईं।नोटबंदी हो, कोरोना हो, महंगाई हो या प्राकृतिक आपदाएं—इन सभी ने यह दिखा दिया कि भारत की असली ताकत उसकी जनता है। कतारें भले ही खत्म न हों, लेकिन उन कतारों में खड़ा हर इंसान उम्मीद और हिम्मत का प्रतीक है। यही वह जज़्बा है जो हर मुश्किल के बाद भारत को फिर से खड़ा कर देता है।
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